कोशिका जीवविज्ञान और शरीर विज्ञान

परिकल्पना

यह प्रभाग सामान्य दैहिकी एवं रोगों के मामले में पद्धति एवं कोशिका जीवविज्ञान, उपकोशिका अवयव की जॉच तथा अंतर्कोशिकीय संकेतन पर कार्य करता है । विशेष रूचि तंत्रिका तंत्र से संबंधित रोगों, प्रजनन दैहिकी एवं प्रजनन नियंत्रण, कार्डियक हाइपरट्रोफी, मधुमेह तथा कुछ मेटाबोलिक एवं पारासिटिक बीमारियों के क्षेत्र में दर्शायी जाती है।

उद्देश्य

तंत्रिका-तंत्र विकार अनुभाग के अर्न्‍तगत अनेक परियोजनाए‍ॅ हैं जो विकासशील एस्ट्रोसाइट की संरचना एवं कार्य पर कारवाई कर रही है ताकि एस्ट्रोग्लीयल कोशिकाओं की प्लास्टिसिटी में आंतरिक नियामकों की कार्रवाई की क्रियाविधि का अध्ययन किया जा सके, नशारोधी औषधि के विकास की दिशा में हानिकारक नशीली दवा के व्‍यसन के आधार को समझना, तंत्रिका अनुत्पादन के आणविक आधार और तंत्रिका सुरक्षा के लिए कार्य नीति के विकास तथा कोर्निल रोपण में स्टेम कोशिकाओं और तंत्रिकाअनुत्पादक बीमारियों के आधार को समझना ।

थायरायड हार्मोन एवं ग्लुकोकोर्टिकॉयड द्वारा हृदय की दुष्क्रिया की क्रियाविधि की जॉच इंडोक्रिनोलोजी अनुभाग में की जाती है । इनके अतिरिक्त इंसुलिन प्रतिरोध की आणविक क्रियाविधि और मधुमेह प्रकार 2 में इंसुलिन संकेतन में त्रुटि, हाइड्रोथायरायड प्रेरित प्रजनन दोष के आनुवंशिक आधार जिसमें लाइसिल हाइड्रोक्‍सी लेजेस की भूमिका पर विशेष बल दिया जाता है, एम. एम. पी. एस. तथा टी. आई. एम. पी.एस तथा अंडाशय संबंध प्रजनन दोष कार्य में होमियोडोमेन रूपांतरण की भुमिका और उसके विकास की जॉच की जाती है ।

प्रजनन जीवविज्ञान अनुभाग के अधीन स्पर्म गतिशीलता और उसके क्रियाकलाप के जैवरासायनिक आधार, प्रजनन संबंधी अपक्रिया के तहत पैथोफिजियोलोजिक क्रियाविधि की व्याखा तथा एच. आई. भी. वीरोधी हॉलमार्क के साथ अवधारणात्मक 'ओवर द काउंटर' गर्भनिरोधी पद्धति के विकास की जॉच की जाती है।

आंत्रिक लिशमानियासिस के दौरान रक्ताल्पता के कारण, प्रदर्शन एवं प्रबंधन, होस्ट-पैथोजेन अंतर्क्रिया तथा मानव पोलियोमैवयरस जे. सी. वी एवं बी. के. वी. प्राकृतिक वियोजनों की आनुवंशिकी और उसके साथ ही माइक्रोबियल आबादी के मेटाजेनोमिक विश्लेषण, खासकर धातु समृद्ध पर्यावरण के एस्क्ट्रिमोफाइल की जॉच भी इस प्रभाग में की जाती है ।