आणविक और मानव आनुवंशिकी

परिकल्पना

इस प्रभाग का प्रधान लक्ष्य भारतीय आबादी में आम तौर पर पाए जाने वाले रोगों के आणविक आनुवंशिक आधार को समझना है ताकि पैथोजेनिक माइक्रोआर्गेनिज्म में जीन प्रकटीकरण एंव कार्य का अध्ययन किया जा सके और साथ ही बेहतर लक्षणों वाले ट्रांसजेनिक पौधों को उगाया जा सके।

उद्देश्य

  • सिर और गर्दन के कैंसर (एच. एन. एस. सी. सी.) में जिनोमिक अस्थिरता के आणविक आधार को स्पष्ट करना तथा इस कैंसर के विकास में शामिल पुटेटिव ट्यूमर सप्रेशर जीनों की पहचान करना ।
  • हेलिकोबैक्टर पाइलोरी युक्त गैस्ट्रोडुयोडोनल रोगों में प्रवणता एलेस को चिह्नित करना ।
  • मौखिक सबमुकोस फाइब्रोसिस के आणविक पैथजेनेसिस का अध्ययन करना ।
  • हैमोफिलिया, ग्लौकोमा, विल्सन रोग और ओक्‍युलो-क्‍युटेनियस अल्बिनिज्म के आणविक आनुवंशिकी को समझना ।
  • पश्चिम बंगाल में आर्सेनिक युक्त पानी को पीने वाली आबादी में स्वास्थ्य प्रभाव, आनुवंशिक क्षति और आनुवंशिक वैभिन्नता का मूल्यांकन करना ।
  • काली चाय पोलिफेनोल थियाफ्लेविन एवं थियारूबिगिन के एंटीमूटाजेनिक और एनिकार्सिनोजेनिक प्रभाव की जॉच करना ।
  • विभिन्न प्रकार से प्रकट वी. कोलरा जीन की पहचान करना, जो होस्ट में संक्रमण पैदा करता है और पैथोजेनेसिस में उसकी भूमिका तथा वी. कोलरा संक्रमण में मानव आंत्रिक एपिथेलियल कोशिका की प्रतिक्रिया का अध्ययन करना ।
  • जैवरासायनिक एवं उत्क्रमित आनुवंशिक दृष्टिकोण के योग का उपयोग करते हुए काइनेटोप्लास्टिड प्रोटोजून लिशमानिया के मिटोकोंड्रिया में नाभिकीय इनकोडेड टी. आर. एन. ए. के आगमन के आणविक आधार का अध्ययन करना।
  • किटाणुओं के विरूद्ध स्वतः रक्षात्मक क्रियाविधि में शामिल गैर-होस्ट पौधों से जीनों की पहचान करना, वियोजित करना और उन्हें आशोधित करना तथा होस्ट-पौधों में उन्हें जैव-कीटनाशकों के रूप में स्थानांतरित करना ।

वैज्ञानिक

मानद वैज्ञानिक (सीएसआईआर)

 


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